यूपी विधानसभा चुनाव 2027: बसपा ने तेज की उम्मीदवारों की तलाश, पश्चिमी उत्तर प्रदेश पर मायावती की खास नजर

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UP Assembly Elections 2027: BSP intensifies search

लखनऊ। UP Assembly Elections 2027: BSP intensifies search, उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में भले ही अभी छह माह से ज्यादा का वक्त है लेकिन बहुजन समाज पार्टी प्रत्याशियों के चयन में तेजी से जुटी है। वैसे तो पूर्वी व मध्य उत्तर प्रदेश से लेकर बुंदेलखंड की भी कुछ-कुछ सीटों के प्रत्याशी तय हो चुके हैं लेकिन पार्टी सुप्रीमो मायावती की खास नजर पश्चिमी उत्तर प्रदेश पर है।
उत्तर प्रदेश की चार बार मुख्यमंत्री रहीं मायावती ने पार्टी के पदाधिकारियों से कहा है कि जुलाई में ही मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद व बरेली मंडल की लगभग सौ सीटों में से एक-तिहाई सीटों के प्रत्याशियों का चयन कर घोषित कर दिया जाए। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के पदाधिकारियों के साथ मंगलवार को बैठक में मायावती ने बूथ स्तर तक संगठन को खड़ा करने के साथ ही सदस्यता अभियान की प्रगति और साफ-सुथरी छवि वाले प्रत्याशियों के चन के संबंध में चर्चा की।

सूत्रों के अनुसार बसपा प्रमुख ने पदाधिकारियों से कहा है कि 'सोशल इंजीनियरिंग' का ध्यान रखते हुए पश्चिम की सीटों के 30 से 35 प्रत्याशी जुलाई में ही तय कर लिए जाएं। इनमें 15 तय भी किए जा चुके हैं जिनकी स्थानीय स्तर पर घोषणा का कार्यक्रम तय किया जा रहा है।

प्रभारी घोषित होने वाले चयनित प्रत्याशियों में मुस्लिम समाज के साथ ही ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य व पिछड़ी जातियों के हैं। उल्लेखनीय है कि पूर्व में भी बसपा चयनित प्रत्याशी को पहले-पहल विधानसभा प्रभारी बनाती है। चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद विधिवत चयनित प्रत्याशियों की सूची जारी करती है।

सूत्रों के अनुसार अब तक अकेले ही विधानसभा चुनाव के मैदान में उतरने की घोषणा करती रही बसपा प्रमुख चाहती हैं कि 403 विधानसभा सीटों में से आधी से अधिक पर प्रत्याशी चयन का काम जल्द से जल्द पूरा हो जाए ताकि उन सीटों पर अभी से व्यापक तैयारी कर पार्टी की स्थिति मजबूत की जा सके। ऐसा होने पर भविष्य में दूसरी पार्टी से गठबंधन में संबंधित सीटों पर मजबूती के साथ दावा किया जा सके।

जानकारों का कहना है कि भले ही मायावती गठबंधन की चर्चा को सिरे से खारिज करती रही हैं लेकिन वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने सपा से गठबंधन किया। डेढ़ दशक से सत्ता से बाहर बसपा लगातार कमजोर ही होती दिखी इसलिए कांग्रेस से गठबंधन की चर्चा अंततः हकीकत में भी बदल सकती है। ऐसे में सर्वाधिक नुकसान सपा को ही हो सकता है। विदित हो कि पिछले लोकसभा चुनाव में सपा-कांग्रेस के गठबंधन से भाजपा को बड़ा झटका लगा था। बसपा को एक भी सीट हासिल नहीं हुई थी।